क्या सोचता हूँ, ये बता नहीं सकता | A Hindi Love Poem

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Love is a great feeling, isn’t it?

Love is a strange and beautiful thing. It’s uncontrollable and can come to you when you least expect it. However, people often struggle with saying what they feel and how much they love someone. Expressing feeling doesn’t come naturally to everyone.

Do you love someone and have difficulty in expressing it? If yes then I bet this Hindi poem will touch you. 🙂

क्या सोचता हूँ, ये बता नहीं सकता

– By Deepanshu Gahlaut

क्या सोचता हूँ, ये बता नहीं सकता
हाल ए दिल मैं ये अपना जता नहीं सकता
तेरा चेहरा लगे जैसे एक ख्वाब सा है
बारिश की बूंदो के एहसास सा है
काश के ये सब तुझे बता सकता……..१

तू ही ख्वाबो में, तू हर घडी खयालो में,
क्या कहूँ, तुझे सोचे बिना नहीं रह सकता,
खो जाने का दिल चाहता है तेरी बातो में,
काश के हर लम्हा, हर घड़ी,
हर पल में तुझे सुन सकता …………२

बहती हवा सा लगे तेरा पास से गुजरना,
तेरी बातों में लगे जैसे वक्त का ठहरना,
तेरी हंसी भुलाते है सब गम मेरे,
काश के मैं तुझे हंसा सकता……..३

काश के पास होके भी पास हो सकता,
दिल की बातें लबों से कह सकता,
तेरा होना ही लगे के जैसे सब मिल गया,
काश के मैं अपनी खामोशी से ये सब कह सकता….४

पर काश के मैं ये सब कह सकता,
अपने दर्द ए दिल का हाल बता सकता,
पर एक डर है तुझे खो जाने का,
इसलिए तुझे कुछ बता नहीं सकता…….५

कोई गम नहीं तू न मिले अगर मुझको,
चाहूँगा हर घड़ी, हर लम्हा तुझको,
मानूंगा उस रब से तुझे अपने ख्वाबो में,
कास के मैं ख्वाबो में ही जिया करता …..६

(to be continued…)

If it touched you then please don’t leave without sharing this and your thoughts in the comment.

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One Comment

  1. mohitrox@outlook.com'

    Good poem …..hitting somewhere deeply

     

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