Bachpan Ki Yaadein – A Hindi Poem

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Image Credit: Innocence of Childhood by Samrat Goswami

I personally believe that one of the happiest time of one’s life is their childhood. But when we try to think back to our childhood memories, we struggle to remember those days.

Sometimes you have to recall how it felt to be a child, and remembering those memories from your childhood can make you smile.

I hope that my poem will help you imagine being like a child again.

बचपन की यादें

– By Deepanshu Gahlaut

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,

माँ का आलिंगन, पापा की डाँट,
भाई बहन के साथ नटखट सा व्यव्हार,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,     …..1

बहानो से घर से निकल जाना,
दोस्तों के साथ खेलना और खाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,     …..2

बिना किस्से कहानी सुने नींद ना आना,
माँ की गोद में थक हार कर सो जाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,     …..3

छोटी छोटी बातो पर रूठ जाना,
पल में हँसना और सब भूल जाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,     …..4

अधूरा होमवर्क और स्कूल ना जाने का बहाना,
पापा का डांटना, और माँ का हमेशा बचाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,     …..5

मेहमानों के आने पर माँ के आँचल में छिप जाना,
धीरे से मुस्कुराना और नजरे चुराना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,      …..6

सुबह का नाश्ता और खाना ना खाने का बहाना,
ना खाने की जिद से माँ को सताना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,      …..7

पेपर की टेंशन और ट्यूशन का बहाना,
यारो दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,      …..8

कागज की नाव और बारिश में नहाना,
गावं की गलियाँ और वो बेफिक्रा जमाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,      …..9

बाग़ बग़िया और तितलियों का ठिकाना,
घड़े का पानी और पीपल के नीचे सुस्ताना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,      …..10

चाँद चांदनी और परियो का फ़साना,
सुहाने सपने और नींद का टूट जाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,      …..11

पर ना जाने कहा चला गया वो जमाना,
बचपन ही है एक सफर सुहाना,

वो दिन तो दिन थे यार,
बचपन के दिन थे यार,   ……………..12     (to be continued..)

“If you carry your childhood with you, you never become older” – Tom Stoppard

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4 Comments

  1. kavi_yad32up32@gmail.com'

    I love this poem. Miss you so much my childhood.

  2. ajitbhghgh9876fg@gmail.com'

    मैं इस कविता के साथ प्यार में हूँ मैं अपने बचपन को याद कर रहा हूं.

  3. Neha23gmaildrivehhghggj@gmail.com'

    I really loved the poem. Aisa laga k jaise main apne bachpan me hoon!! 😀😀

    Heart touching. Good work Mr. DEEPANSHU.

  4. vijendergodara07@gmail.com'
    Vijender Godara

    बहुत ही बढ़िया कविता है दीपांशु जी
    बचपन का वो समय बड़ा ही सुकून वाला था

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